उपक्षेत्रीय प्रबंधक पर क्षेत्रीय मानव संसाधन प्रबंधक के आदेशों को चुनौती देने का आरोप

 


उपक्षेत्रीय प्रबंधक पर क्षेत्रीय मानव संसाधन प्रबंधक के आदेशों को चुनौती देने का आरोप

◾घायल कामगार हाजिरी लगाकर लौट रहा घर, प्रबंधक की मौजूदगी में चल रहा यह सिलसिला, फिर भी अनजान है प्रबंधन?

चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र के नंदगांव खदान में हुए हादसे के बाद घायल कामगार कुमारस्वामी गिरवेनी के मामले में स्थानीय प्रबंधन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है चिकित्सीय दस्तावेजों में ‘MINE INJURY WITH POLYTRAUMA WITH ABDOMEN DISTENSION’ दर्ज होने के बावजूद घायल कर्मचारी को अब तक ‘इंजुरी ऑन ड्यूटी’ का लाभ क्यों नहीं दिया गया? जब चिकित्सा दस्तावेजों में माइन इंजुरी का उल्लेख है तो फिर घायल कामगार के सेवा संबंधी अधिकारों पर चुप्पी क्यों?

इस मामले में राज्य रिपोर्टर न्यूज़ की टीम प्रबंधन का पक्ष जानने नंदगांव खदान पहुंची, लेकिन खान प्रबंधक और मानव संसाधन प्रबंधक अपने कार्यालयों में उपस्थित नहीं मिले , इसके बाद खदान में कार्यरत अन्य कर्मचारियों से जानकारी लेने पर पता चला कि घायल कामगार रोज हाजिरी लगाकर घर लौट रहा है उसे खदान तक लाने और वापस घर पहुंचाने के लिए एक अन्य कर्मचारी की नियुक्ति भी की गई है.

हैरानी की बात यह है कि यह सिलसिला उस समय भी जारी होने की जानकारी सामने आई, जब उपक्षेत्रीय प्रबंधक स्वयं नंदगांव खदान में मौजूद थे. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या उपक्षेत्रीय प्रबंधक को इस व्यवस्था की जानकारी नहीं है, या फिर उनकी मौजूदगी में ही यह सब चल रहा है? यदि घायल कर्मचारी को नियमित ड्यूटी करने के बजाय केवल हाजिरी लगाकर घर लौटना पड़ रहा है, तो उसकी उपस्थिति दर्ज करने का उद्देश्य क्या है और उसकी चिकित्सीय स्थिति की जिम्मेदारी किसकी है?

वेकोलि मुख्यालय स्तर पर रविवार को अवकाश के दिन घायल कर्मचारी की अस्पताल से डिस्चार्ज की प्रक्रिया और उसके बाद बिना मेडिकल फिटनेस के ड्यूटी पर आने से जुड़े सवालों का जवाब भी जरूरी है.

क्या इस हादसे की जांच हुई? क्या महानिदेशक खान सुरक्षा (DGMS) को सूचना दी गई? इन सवालों पर स्थानीय प्रबंधन से संपर्क करने के बावजूद स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से संदेह गहराता जा रहा है क्या किसी प्रभावशाली श्रमिक संगठन के दबाव में मामले को दबाने की कोशिश हो रही है? लालपेठ उपक्षेत्र में अलग-अलग संगठनों के चार टीएससी सदस्य कार्यरत होने की जानकारी के बावजूद उनकी ओर से पहल नहीं होने पर भी सवाल उठ रहे हैं.

विडंबना यह है कि अब तक किसी संगठन के पदाधिकारी द्वारा घटना की रिपोर्ट मांगने या जवाबदेही तय करने के लिए ठोस पहल किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है यदि श्रमिक संगठनों और टीएससी सदस्यों की भूमिका कामगारों के अधिकारों की रक्षा करना है तो इस मामले में उनकी चुप्पी क्यों? आखिर घायल कामगार को न्याय दिलाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा?



Post a Comment

0 Comments