नंदगांव खदान संकट में !
◾सैकड़ों कामगारों की जान पर मंडराया खतरा
◾आगामी सदस्यता सत्यापन से पहले जांच की मांग
चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : चंद्रपुर क्षेत्र की नंदगांव खदान में कथित जाहिरिली गैस रिसाव की घटना ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं शनिवार की प्रथम पाली में 19 लेवल के 28 डीप के आसपास कार्बन मोनोऑक्साइड की अत्यधिक मात्रा मिलने की जानकारी सामने आई है बताया जा रहा है कि जाहिरिली गैस का रिसाव इतना अधिक था कि संबंधित परिसर धुंधलामय हो गया. उस समय वहां कई कामगारों के मौजूद होने की बात भी कही जा रही है ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि यदि स्थिति कुछ और बिगड़ती तो क्या सैकड़ों कामगारों की जान पर बन नहीं आती?
जानकारी के अनुसार वर्तमान में नंदगांव खदान में पैनल-सी का संचालन और डेवलपमेंट कार्य जारी है फिलहाल टॉप लिफ्ट का डेवलपमेंट चल रहा है इससे पहले टॉप लिफ्ट के नीचे एक अन्य लिफ्ट संचालित किए जाने की जानकारी है आरोप है कि उस दौरान कुछ स्थानों पर पर्याप्त मात्रा में रेती भराव नहीं किया गया इसी वजह से जाहिरीली गैस के रिसाव का खतरा पैदा होने की आशंका जताई जा रही है.
शनिवार को प्रथम पाली के दौरान 19 लेवल के 28 डीप के समीप कथित तौर पर कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर न्यूनतम निर्धारित सीमा से काफी अधिक पाया गया गैस की अधिकता के कारण परिसर में धुंध जैसी स्थिति बनने की बात सामने आई है सबसे गंभीर पहलू यह है कि घटना के समय वहां कई कामगार कार्यरत बताए जा रहे हैं यदि समय रहते स्थिति पर नियंत्रण नहीं पाया जाता तो यह घटना एक बड़े औद्योगिक हादसे का रूप ले सकती थी. सवाल यह है कि आखिर भूमिगत खदान में जहरीली गैस के स्तर में इतनी वृद्धि कैसे हुई और सुरक्षा निगरानी व्यवस्था को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं हुई?
कामगारों के बीच चर्चा है कि पूर्व में संबंधित क्षेत्र में पर्याप्त रेती भराव नहीं किए जाने के कारण गैस के रिसाव की स्थिति बनी थी यदि यह बात सही है तो मामला महज तकनीकी गड़बड़ी का नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और संभावित लापरवाही का बन सकता है खदानों में सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता सीधे तौर पर कामगारों की जिंदगी को जोखिम में डालता है ऐसे में इस घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग जोर पकड़ रही है.
गौरतलब है कि आगामी दिनों में कामगारों का सदस्यता सत्यापन प्रस्तावित है ऐसे समय में नंदगांव खदान की यह घटना श्रमिक संगठनों के लिए भी बड़ी परीक्षा बन गई है अब कामगारों की नजर इस बात पर टिकी है कि कौन-सा श्रमिक संगठन सबसे पहले खुलकर सामने आता है और जाहिरिली गैस रिसाव की निष्पक्ष जांच की मांग करता है? क्या संगठन सिर्फ सदस्यता सत्यापन के दौरान कामगारों के बीच दिखाई देंगे, या उनकी सुरक्षा के सवाल पर भी प्रबंधन के सामने मजबूती से आवाज उठाएंगे?
कामगारों के बीच यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में खामी है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाएंगे. अब जरूरत बयानबाजी की नहीं, बल्कि जांच और जवाबदेही की है नंदगांव खदान में जाहिरिली गैस रिसाव की घटना को गंभीरता से लेते हुए पूरे घटनाक्रम की तकनीकी जांच, जिम्मेदारी तय करने और कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है.
यह समाचार विश्वसनीय सूत्रों ओर कामगारों की चर्चा पर आधारित है प्रबंधन का स्पष्टीकरण आते ही उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा.







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