लालपेठ ओपन कास्ट में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा भगवान भरोसे!
◾चोरी के 6 दिन बाद जागा प्रबंधन, 16 अक्टूबर को पुलिस में शिकायत
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र के लालपेठ ओपन कास्ट में सरकारी संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं खदान परिसर स्थित डीजल रूम का ताला तोड़कर करीब 18 हजार रुपये का सामान चोरी होने का मामला सामने आया है हैरानी की बात यह है कि घटना 9 और 10 अक्टूबर के बीच होने की बात कही गई, जबकि सुरक्षा प्रभारी की ओर से पुलिस में रिपोर्ट 16 अक्टूबर को दर्ज कराई गई. यानी चोरी की घटना के छह दिन बाद प्रबंधन की ओर से पुलिस तक मामला पहुंचा. जिससे इस देरी ने सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार लालपेठ ओपन कास्ट के डीजल पंप रूम का ताला तोड़े जाने और वहां से सामग्री गायब होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया , दरम्यान खदान परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में दो युवक प्रतिबंधित क्षेत्र में संदिग्ध रूप से घूमते दिखाई देने की जानकारी सामने आई. इसके बावजूद मामले में तत्काल और निर्णायक कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह सवाल अब भी कायम है.
पुलिस में दी गई रिपोर्ट के अनुसार, चोरी गए सामान में एक स्टेबलाइजर (1 KVA), एक वीटी (1 KVA), पांच लीटर का कोनिकल मेजर और डीजल टैंक डिप स्ट्रिप शामिल हैं इनकी कुल कीमत 18 हजार रुपये बताई गई है रिपोर्ट में घटना का समय 9 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 10 अक्टूबर की सुबह 8 बजे के बीच बताया गया है .
मामले में समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं प्रबंधन की ओर से पुलिस को दी गई रिपोर्ट में चोरी की संभावित अवधि 9 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 10 अक्टूबर की सुबह 8 बजे तक बताई गई है तो वहीं विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चोरी की घटना 9 अक्टूबर को शाम 4 बजे से पहले ही होने की आशंका जताई जा रही है ऐसे में वास्तविक घटनाक्रम का पता लगाने के लिए डीजल रूम के रिकॉर्ड, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की जानकारी और सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच आवश्यक हैं.
इस पूरे मामले को और संदिग्ध बनाने वाली बात चोरी गए सामान के अगले ही दिन वापस लगाए जाने की चर्चा है यदि सामान चोरी हुआ हैं तो वह वापस किसने रखा? क्या किसी संदिग्ध की पहचान हुई थी? क्या सामान की बरामदगी की कोई आधिकारिक सूचना पुलिस को दी गई? अथवा मामले को आपसी स्तर पर निपटाने का प्रयास किया गया? इन सवालों के जवाब अब तक स्पष्ट नहीं हैं हालांकि, सामान की वापसी और किसी संभावित समझौते को लेकर सामने आई बातों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है इसलिए यह जरूरी है कि प्रबंधन और पुलिस तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करें.
सरकारी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए, जब खदान परिसर में चोरी की सूचना सामने आई, सीसीटीवी फुटेज की जांच हुई और संदिग्ध युवक दिखाई दिए, तो शिकायत दर्ज कराने में 6 दिन क्यों लगे? क्या इस दौरान चोरी गए सामान की तलाश की गई? यदि सामान मिल गया था, तो उसकी बरामदगी का रिकॉर्ड कहां है?
मामले की जानकारी उपक्षेत्रीय प्रबंधन तक पहुंचने के बावजूद ठोस कार्रवाई को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से संदेह और गहरा रहा है.
लालपेठ ओपन कास्ट की यह घटना केवल 18 हजार रुपये के सामान की चोरी तक सीमित नहीं है यह खदान की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा मामला है यदि चोरी हुई, तो दोषियों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए, यदि सामान बरामद हुआ तो उसकी आधिकारिक जानकारी और रिकॉर्ड सामने आना चाहिए.
अब सवाल यह है कि लालपेठ प्रबंधन इन गंभीर सवालों का जवाब देगा या सरकारी संपत्ति की सुरक्षा में हुई कथित चूक को नजरअंदाज कर दिया जाएगा? पूरे मामले में सीसीटीवी फुटेज, चोरी की वास्तविक समयावधि, सामान की वापसी और 16 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराने के कारणों की निष्पक्ष जांच जरूरी है.




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