दुर्गापुर खदान में 40 टन मार्शल क्रेन फिसली, बड़ा हादसा टला
◾ऑपरेटर मामूली घायल, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड चंद्रपुर क्षेत्र के दुर्गापुर ओपन कास्ट खदान में बुधवार दोपहर करीब 1 बजे 40 टन क्षमता वाली मार्शल क्रेन फिसलने की घटना सामने आई है खदान के सेक्टर-4 में पंप से संबंधित कार्य के दौरान यह हादसा हुआ, घटना के समय क्रेन पर ऑपरेटर योगेश कॉमेडी कार्यरत बताए जा रहे हैं प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे में ऑपरेटर को मामूली चोटें आई हैं गनीमत रही कि इस घटना में कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई और बड़ा हादसा टल गया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार सेक्टर-4 में पंप से संबंधित कार्य के लिए उक्त भारी क्षमता वाली क्रेन का इस्तेमाल किया जा रहा था इसी दौरान क्रेन फिसल गई. घटना के बाद खदान परिसर में हलचल मच गई, 40 टन जैसी भारी क्षमता वाली मशीन के फिसलने की घटना ने खदान में सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सबसे गंभीर सवाल उस स्थान को लेकर उठ रहे हैं जहां क्रेन से कार्य कराया जा रहा था, जानकारी के अनुसार जिस जगह क्रेन कार्यरत थी वह सुरक्षित कार्य के लिहाज से उपयुक्त नहीं होने की बात सामने आ रही है ऐसे में सवाल उठता है कि भारी क्षमता वाली क्रेन को उक्त स्थान पर काम करने की अनुमति किस स्तर पर दी गई और कार्य शुरू करने से पहले स्थल की सुरक्षा, जमीन की स्थिति तथा अन्य तकनीकी मानकों की जांच की गई थी या नहीं?
भारी क्षमता वाली क्रेन के संचालन में मामूली चूक भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है ऐसे में क्रेन के संचालन से पहले कार्यस्थल का निरीक्षण, जमीन की स्थिति, क्रेन की स्थिरता, कार्यक्षेत्र की सुरक्षा तथा ऑपरेटर की दक्षता की जांच की गई थी या नहीं यह जांच का विषय बन गया है.
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि 40 टन क्षमता वाली यह मार्शल क्रेन पूरे चंद्रपुर क्षेत्र में उपलब्ध ऐसी एकमात्र क्रेन है इसके संचालन के लिए वरिष्ठ एवं अनुभवी ऑपरेटर की आवश्यकता होने के बावजूद जूनियर ऑपरेटर से क्रेन संचालित कराए जाने का आरोप लगाया जा रहा है आरोप है कि प्रबंधन के दबाव में जूनियर ऑपरेटर को इतनी भारी क्षमता वाली क्रेन के संचालन की जिम्मेदारी दी गई, यदि यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल क्रेन फिसलने की घटना तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि सुरक्षा प्रोटोकॉल और जिम्मेदारी तय करने से जुड़ा गंभीर विषय बन जाएगा.
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या क्रेन संचालन के लिए निर्धारित दक्षता और अनुभव संबंधी नियमों का पालन किया गया था? क्या कार्यस्थल का सेफ्टी असेसमेंट किया गया था? साथ ही क्रेन को कार्य के लिए तैनात करने से पहले उसकी तकनीकी स्थिति और जमीन की भार वहन क्षमता की जांच की गई थी या नहीं इसकी भी जांच आवश्यक है.
घटना के संबंध में दुर्गापुर प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन संबंधित अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका. प्रबंधन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों तथा सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
फिलहाल 40 टन की भारी क्षमता वाली मार्शल क्रेन के फिसलने की घटना ने दुर्गापुर खदान की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं घटना की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर क्रेन के फिसलने का वास्तविक कारण, कार्यस्थल की सुरक्षा व्यवस्था, ऑपरेटर की नियुक्ति तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट किए जाने की मांग उठ रही है.








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