कोल इंडिया में पदोन्नति या पक्षपात? E-6 प्रमोशन आदेश पर उठे सवाल
◾‘क्रिटिकल स्ट्रैटेजिक लोकेशन’ के नाम पर नियमों को दरकिनार करने का आरोप
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : देश की सबसे बड़ी कोयला कंपनी में से एक कोल इंडिया लिमिटेड में हाल ही में जारी पदोन्नति आदेश को लेकर अधिकारियों के बीच असंतोष और नाराजगी का माहौल नजर आ रहा है.
5 मई 2026 को जारी कार्यालय आदेश के तहत E-5 ग्रेड के विभिन्न विभागों के प्रबंधकों को E-6 ग्रेड में वरिष्ठ प्रबंधक पद पर पदोन्नति दी गई लेकिन अब इस आदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार 10 मार्च 2026 को कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा जारी कार्यालय आदेश के माध्यम से वर्तमान प्रावधानों में संशोधन (Amendment) करते हुए ट्रांसफर और प्रमोशन संबंधी नए नियम लागू किए गए थे बताया जा रहा है कि यह निर्णय बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 488वीं बैठक में लिया गया था हालांकि, सूत्रों का दावा है कि नए संशोधित प्रावधानों में “क्रिटिकल स्ट्रैटेजिक लोकेशन” जैसी किसी विशेष व्यवस्था का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया था.
इसके बावजूद 5 मई 2026 के पदोन्नति आदेश में कुछ अधिकारियों को “क्रिटिकल स्ट्रैटेजिक लोकेशन” का हवाला देकर उनकी वर्तमान कंपनी में ही पदोन्नति दे दी गई जबकि अन्य अधिकारियों को दूसरी अनुसंगी कंपनियों में तबादले के साथ पदोन्नति का आदेश थमा दिया गया. इसी असमानता को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि आखिर एक ही नियम के तहत अलग-अलग मानदंड क्यों अपनाए गए?
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कई अधिकारियों ने नाराजगी जाहिर करते हुए बताया कि उन्होंने घरेलू परिस्थितियों, बच्चों की शिक्षा, गंभीर चिकित्सा कारणों और पारिवारिक दायित्वों का हवाला देते हुए स्थानांतरण आदेश में कुछ समय की राहत देने की विनती की थी, लेकिन प्रबंधन ने ऐसे संवेदनशील मामलों को दरकिनार कर कई अधिकारियों को वर्तमान कंपनी से रिलीज कर दिया गया.
अधिकारियों का आरोप है कि जिन नियमों को बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने बनाया उन्हीं नियमों का पालन करने में पारदर्शिता नहीं बरती गई उनका कहना है कि “जरूरतमंद अधिकारियों की मानवीय परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया गया जबकि कुछ को विशेष प्रावधानों के नाम पर लाभ पहुंचाया गया. जिससे अब यह मामला केवल पदोन्नति और तबादले तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि “नीतियों के चयनात्मक इस्तेमाल” और “प्रशासनिक पारदर्शिता” पर भी सवाल खड़े कर रहा है अधिकारियों के बीच चर्चा है कि यदि बोर्ड के संशोधित प्रावधानों में “क्रिटिकल स्ट्रैटेजिक लोकेशन” का स्पष्ट प्रावधान नहीं था तो फिर इसका इस्तेमाल किस आधार पर किया गया?
इस पूरे मामले में अब संबंधित विभाग और कोल इंडिया के उच्च स्तरीय अधिकारियों से निष्पक्ष जांच की मांग हो।रही है अधिकारियों का मानना है कि यदि तत्काल इस मामले की जांच नहीं हुई तो अधिकारियों की नाराजगी का असर कार्य पर पढ़ने की संभावना जताई जा रही है.






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