प्रबंधन द्वारा फर्जी लेटरहेड और जाली अनुभव प्रमाण पत्र मामले को दबाने की साजिश?

 



प्रबंधन द्वारा फर्जी लेटरहेड और जाली अनुभव प्रमाण पत्र मामले को दबाने की साजिश?

 चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र के दुर्गापुर उपक्षेत्र में सामने आए फर्जी लेटरहेड और जाली अनुभव प्रमाण पत्र प्रकरण ने पूरे कोल इंडिया में सनसनी फैला दी है सबसे गंभीर बात यह है कि इतना बड़ा मामला उजागर होने के बावजूद अब तक प्रबंधन और विजिलेंस विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से इस मामले पर पर्दा डालने की साजिश की चर्चा तेज हो गई है.

राज्य रिपोर्टर न्यूज़ द्वारा लगातार दो दिनों से प्रकाशित खबरों में यह खुलासा किया गया कि वेकोली के नाम से उपक्षेत्र प्रबंधक कार्यालय पाथरी उपक्षेत्र के फर्जी लेटरहेड का उपयोग कर कथित कार्यालय आदेश जारी किया गया इतना ही नहीं तो दुर्गापुर उपक्षेत्र के उपक्षेत्रीय अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिक) के हस्ताक्षर वाला कथित जाली अनुभव प्रमाण पत्र भी तैयार कर जारी किया गया. 

सूत्रों के अनुसार इस फर्जीवाड़े में केवल दस्तावेज तैयार करने तक ही मामला सीमित नहीं था बल्कि वेकोली के विभिन्न क्षेत्रों तथा कोल इंडिया की अन्य कंपनी के कर्मचारियों को दुर्गापुर क्षेत्र का कर्मचारी दर्शाकर कथित रूप से स्थानांतरण आदेश जारी करने जैसे गंभीर कृत्य भी किए गए . यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि संगठित फर्जीवाड़े और मिलीभगत की ओर संकेत करता दिखाई दे रहा है.

हैरानी की बात यह है कि इतना संवेदनशील मामला सार्वजनिक होने के बाद भी वेकोली प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है साथ ही विजिलेंस विभाग की चुप्पी भी संदेह को और गहरा कर रही है जिससे कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों के बीच यह चर्चा हो रही है कि आखिर किसे बचाने के लिए जांच को ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है?

विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि यह पूरा खेल वर्ष 2024 से जारी था और इसमें चंद्रपुर क्षेत्र के तत्कालीन अधिकारियों तथा कुछ वर्तमान कर्मचारियों की कथित मिलीभगत रही है चर्चा यह भी है कि कुछ अधिकारियों के विजिलेंस विभाग से करीबी संबंध होने के कारण मामले को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल फर्जी दस्तावेज बनाने का मामला नहीं रहेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और संरक्षण का बड़ा घोटाला बन सकता है.

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब वेकोली जैसी प्रतिष्ठित कंपनी के नाम और अधिकारियों के हस्ताक्षर तक सुरक्षित नहीं हैं तो आम कर्मचारियों के दस्तावेज और प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी सुरक्षित है? जिससे अब कोल इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.




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