वेकोली में फर्जी लेटरपैड का खेल!

 



वेकोली में फर्जी लेटरपैड का खेल!

◾एक ही डिस्पैच नंबर पर दो ट्रांसफर आदेश, NEIS नंबरों में बड़ा घोटाला

चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के चंद्रपुर क्षेत्र अंतर्गत दुर्गापुर ओपन कास्ट उपक्षेत्र में फर्जी स्थानांतरण आदेशों और कथित नकली लेटरपैड के इस्तेमाल का बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है एक ही दिन, एक ही डिस्पैच नंबर से अलग-अलग उपक्षेत्रों के नाम पर जारी दो स्थानांतरण पत्रों ने पूरे वेकोली प्रशासन में खलबली मचा दी है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार उपक्षेत्रीय अभियंता (विद्युत एवं यांत्रिक) दुर्गापुर ओपन कास्ट उपक्षेत्र के हस्ताक्षर वाले स्थानांतरण पत्रों में कुल 4 कर्मचारियों के नाम दर्शाए गए हैं हैरानी की बात यह है कि जिन कर्मचारियों को दुर्गापुर उपक्षेत्र का बताया गया उनमें से कई के NEIS नंबर अन्य क्षेत्रों और कंपनियों से जुड़े पाए गए. 

सूत्रों के अनुसार एक कर्मचारी का NEIS नंबर SECL के कुसमुंडा क्षेत्र का बताया जा रहा है जबकि अन्य कर्मचारियों के नंबर बल्लारपुर और उमरेड क्षेत्र से संबंधित पाए गए हैं इतना ही नहीं जिस कर्मचारी को दुर्गापुर उपक्षेत्र का दर्शाया गया उसका NEIS नंबर नागपुर क्षेत्र के किसी अन्य कर्मचारी से मेल खाने की जानकारी सामने आई है दोनों कर्मचारियों के नाम भी अलग बताए जा रहे हैं. 

मामले को और गंभीर तब माना गया जब दूसरे स्थानांतरण पत्र में उन्हीं 4 कर्मचारियों में से एक कर्मचारी का नाम बदलकर नया नाम दर्ज किए जाने की बात सामने आई हालांकि इस दूसरे पत्र में कर्मचारियों के नाम और NEIS नंबर सही बताए जा रहे हैं लेकिन संबंधित अधिकारी द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किए जाने की चर्चा जोरों पर है. 

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार फर्जी लेटरपैड और संदिग्ध ट्रांसफर आदेशों का यह खेल वर्ष 2024 से चल रहा हो सकता है यदि यह दावा सही साबित होता है तो मामला केवल वेकोली तक सीमित न रहकर कोल इंडिया की अन्य कंपनियों तक फैलने की आशंका जताई जा रही है . 

मामला सामने आने के बाद वेकोली और कोल इंडिया के विजिलेंस विभाग से तत्काल उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है कर्मचारियों में भी इस पूरे प्रकरण को लेकर भारी रोष व्याप्त है.

बताया जा रहा है कि यदि चंद्रपुर क्षेत्र मे फर्जी लेटरपैड और ट्रांसफर आदेशों का नेटवर्क सक्रिय है तो यह केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं बल्कि बड़े स्तर का संगठित भ्रष्टाचार और दस्तावेज़ फर्जीवाड़ा साबित हो सकता है जिससे अब सबकी निगाहें वेकोली प्रबंधन और विजिलेंस विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर इस कथित फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग हैं और कब तक इस पूरे रैकेट का खुलासा होता है.




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