नियुक्ति से पहले ही थमा दिया 15 महीनों का अनुभव प्रमाणपत्र!
◾दुर्गापुर उपक्षेत्र के उपक्षेत्रीय अभियंता पर उठे सवाल
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र के दुर्गापुर उपक्षेत्र से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ विद्युत एवं यांत्रिक विभाग के उपक्षेत्रीय अभियंता द्वारा एक कर्मचारी को उसकी नियुक्ति से पहले ही 1 वर्ष 3 महीने का अनुभव प्रमाणपत्र जारी किए जाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार उपक्षेत्रीय अभियंता ने दिनांक 25 अक्टूबर 2024 को संबंधित कर्मचारी के नाम से अनुभव प्रमाणपत्र जारी किया, जिसमें यह प्रमाणित किया गया कि उक्त कर्मचारी को “ऑल टाइप्स ऑफ इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस इन ई एंड एम डिपार्टमेंट" का अनुभव है प्रमाणपत्र में एचटी एवं एलटी इक्विपमेंट, 11 केवी एवं 33 केवी ओएच लाइन, 440 वोल्ट , 110 वोल्ट कंट्रोलिंग सर्किट आदि कार्यों में अनुभव होने का उल्लेख किया गया है.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस कर्मचारी की नियुक्ति ही वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र में 29 अक्टूबर 2024 को हुई उसे 25 अक्टूबर 2024 को ही 15 महीनों का अनुभव प्रमाणपत्र आखिर किस आधार पर जारी कर दिया गया? नियुक्ति आदेश जारी होने से चार दिन पहले अनुभव प्रमाणपत्र देना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है बल्कि पूरे मामले में गंभीर अनियमितता और दस्तावेजी हेरफेर की आशंका भी निर्माण करता है.
सूत्रों के अनुसार इस मामले को लेकर कर्मचारियों एवं क्षेत्र में भारी नाराजगी व्याप्त है कर्मचारियों का कहना है कि यदि इस प्रकार नियुक्ति से पहले ही अनुभव प्रमाणपत्र जारी किए जाने लगे तो भर्ती प्रक्रिया और वेकोली की पारदर्शिता दोनों पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है.
अब मांग उठ रही है कि क्षेत्रीय प्रबंधन इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराए तथा स्पष्ट करे कि आखिर किन परिस्थितियों में यह प्रमाणपत्र जारी किया गया साथ ही यह भी जांच हो कि क्या इस मामले में किसी प्रकार का दबाव, पक्षपात या नियमों की अनदेखी की गई है.
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि यदि प्रबंधन द्वारा समय रहते इस मामले की जांच नहीं की गई तो संबंधित दस्तावेजों के साथ उच्च अधिकारियों एवं संबंधित विभागों में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.
दुर्गापुर उपक्षेत्र का यह मामला अब केवल एक अनुभव प्रमाणपत्र तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि यह वेकोली प्रशासन की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है.






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