क्षेत्रीय अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर क्षेत्र के सबसे बड़े संगठन की चुप्पी
◾इंटक–बीएमसी–सीटू–ऐटक ने दी प्रतिक्रिया
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड चंद्रपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अस्पताल में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है 50 बिस्तरों वाले इस क्षेत्रीय अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों, उनके परिजनों और कामगारों की आवाजाही रहती है बावजूद इसके अस्पताल में पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर, फायर अलार्म, आपातकालीन निकास तथा प्रशिक्षित अग्नि सुरक्षा कर्मियों की व्यवस्था नहीं है.
इस गंभीर मामले में अब क्षेत्र के श्रमिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं हालांकि क्षेत्र के सबसे बड़े संगठन एचएमएस की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
ला झं को मा म यूनियन (सीटू) के वेकोली महासचिव कॉ जी. रामन्ना ने बताया कि संगठन द्वारा उपरोक्त्त विषय में क्षेत्रीय चिकित्सालय का निरीक्षण करने के पश्चात सूचित किया जाएगा.
इंटक के वेकोली महामंत्री के. के. सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंद्रपुर का क्षेत्रीय अस्पताल अनियमिताएं , भ्रष्टाचार और भाई भतीजाबाद का अड्डा बन गया है और रही बात अग्निशमन यंत्रों का तो शुरू से ही इसका अभाव रहा है और न केवल यह एक चूक है बल्कि मरीज उनके परिजनों की जिंदगी एवं बेशकीमती मशीन को बर्बाद कर काम ना कर वेतन लेने का एकमात्र कोशिश है .
भारतीय कोयला खदान मजदूर संघ (बीएमसी) की ओर से प्राप्त प्रतिक्रिया में बताया गया कि वेकोली में सुरक्षा संसाधनों एवं सुरक्षा संबंध में फंड की कोई कमी नहीं है इसके बावजूद अस्पताल में सुरक्षा साधनों को लेकर लापरवाही समझ से परे है संगठन ने मांग की है कि अग्नि सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही को शीघ्र दूर किया जाए, अन्यथा संगठन को आंदोलनात्मक कार्रवाई के लिए बाध्य होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रबंधन की होगी.
ऐटक के क्षेत्रीय सचिव प्रदीप चिताड़े ने कहा कि अस्पताल में अविलंब आवश्यक सुरक्षा साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए इस संदर्भ में संगठन की ओर से शीघ्र ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से चर्चा की जाएगी.
कामगार एवं उनके परिजनों से जुड़े इतने गंभीर मामले में क्षेत्र के सबसे बड़े संगठन एचएमएस द्वारा कोई प्रतिक्रिया न दिया जाना चर्चा का विषय बना हुआ है संगठन की इस चुप्पी को लेकर कर्मचारियों के बीच तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं.
अब देखना यह होगा कि प्रबंधन इस ओर कोई ठोस कदम उठाता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा ?






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