फायर एक्सटिंग्विशर के भरोसे वेकोली के क्षेत्रीय अस्पताल
◾पाथाखेड़ा की घटना बनी चेतावनी, फिर भी नहीं जागा प्रबंधन!
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के चंद्रपुर एवं पाथाखेड़ा के क्षेत्रीय अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही उजागर हुई है करोड़ों रुपये के आधुनिकीकरण के दावों के बावजूद जमीनी हकीकत यह है कि ये अस्पताल आज भी फायर एक्सटिंग्विशर के भरोसे चल रहे हैं जबकि यहां प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों, परिजनों और कामगारों की आवाजाही होती है.
50 बिस्तरों वाले चंद्रपुर क्षेत्रीय अस्पताल में न तो पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर उपलब्ध हैं न ही फायर अलार्म सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्ग और न ही प्रशिक्षित अग्नि सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है किसी भी आपात स्थिति में यह अस्पताल एक बड़े हादसे को खुला निमंत्रण देता नजर आ रहा है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गत वर्ष 11 अक्टूबर को पाथाखेड़ा क्षेत्रीय अस्पताल के मेल वार्ड के एक खाली कमरे में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई थी उस समय वार्ड में मरीज भर्ती थे, हालांकि राहत की बात यह रही कि आग जिस कमरे में लगी वहां कोई मरीज मौजूद नहीं था परंतु आग में बेड और मेडिकल उपकरण जलकर खाक हो गए . रेस्क्यू टीम और दमकल विभाग की तत्परता से बड़ा हादसा टल गया लेकिन यह घटना वेकोली प्रबंधन के लिए एक गंभीर चेतावनी थी.
हैरानी की बात यह है कि इस घटना के महीनों बाद भी अग्नि सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए. सूत्रों के अनुसार वेकोली जैसे बड़े संस्थान के पास स्वयं के फायर ब्रिगेड वाहन तक नहीं है और आग लगने की स्थिति में बाहरी सेवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है.
वेकोली प्रबंधन द्वारा अस्पतालों के आधुनिकीकरण पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि मूलभूत सुरक्षा इंतजामों का घोर अभाव बना हुआ है न नियमित फायर ऑडिट, न मॉक ड्रिल और न ही कर्मचारियों को किसी प्रकार का प्रशिक्षण दिया जाता हैं.
अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या वेकोली प्रबंधन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में इसकी कीमत जान-माल के नुकसान के रूप में चुकानी पड़ सकती है.






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