SC-ST बैकलॉग पदोन्नति विवाद में नया मोड़; यूनियन में अंदरूनी खींचतान की चर्चा

 





SC-ST बैकलॉग पदोन्नति विवाद में नया मोड़; यूनियन में अंदरूनी खींचतान की चर्चा 

◾राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के नोटिस के बाद भटाड़ी में दो कर्मचारियों की पदोन्नति रद्द !


 चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के चंद्रपुर क्षेत्र में SC-ST बैकलॉग पदों को अनारक्षित कर अन्य कैटेगरी में पदोन्नति दिए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है एक ओर इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंच चुकी है और आयोग ने WCL के CMD से 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है वहीं दूसरी ओर भटाड़ी उपक्षेत्र में दो कर्मचारियों की क्लर्क ग्रेड-III से क्लर्क ग्रेड-II में हुई पदोन्नति को निरस्त करने का कार्यालय आदेश 13 अगस्त 2026 को जारी कर दिया गया है इस घटनाक्रम ने पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता और आरक्षण नीति के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

मामला तब सुर्खियों में आया जब एक संगठन के पदाधिकारी ने SC-ST बैकलॉग पदों को अनारक्षित कर अन्य कैटेगरी में पदोन्नति दिए जाने को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत की गई.  शिकायत में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2025-26 में SC-ST के बैकलॉग पदों को अनारक्षित कर पदोन्नति की गई और इस प्रक्रिया में आरक्षण संबंधी नियमों की अनदेखी हुई. 

शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संज्ञान लेते हुए WCL के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक को नोटिस जारी कर शिकायत में लगाए गए आरोपों पर तथ्य, जानकारी और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने को कहा था. निर्धारित समय में जवाब नहीं मिलने पर आयोग ने संबंधित अधिकारियों को समन जारी करने की चेतावनी भी दी थी. 

इसी बीच 13 अगस्त 2026 को जारी भटाड़ी उपक्षेत्र के कार्यालय आदेश ने पूरे विवाद को और हवा दे दी.  आदेश में स्पष्ट किया गया है कि 11 जून 2026 के कार्यालय आदेश क्रमांक 2297 के माध्यम से गठित कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार भटाड़ी खुली खान में पदस्थ दो कर्मचारियों की वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में क्लर्क ग्रेड-III से क्लर्क ग्रेड-II में हुई पदोन्नति को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है.

सवाल यही है कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया पूरी तरह नियमसम्मत थी तो कमेटी की जांच के बाद दो पदोन्नतियों को रद्द करने की नौबत आखिर क्यों आई? और यदि प्रक्रिया में खामी थी तो जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी?

इस प्रकरण के बाद संबंधित संगठन के भीतर अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं तेज हो गई हैं इस पदोन्नति को लेकर संगठन के भीतर विरोध की स्थिति सामने आने का दावा किया जा रहा है यही वजह है कि अब मामला केवल कर्मचारी की पदोन्नति तक सीमित नहीं रह गया है आरक्षण नीति, पदोन्नति प्रक्रिया और मजदूर संगठनों के भीतर वर्चस्व की राजनीति ऐसे तीनों सवाल एक साथ खड़े हो गए हैं .

राष्ट्रीय आयोग के नोटिस और भटाड़ी में दो पदोन्नतियों के निरस्तीकरण ने प्रबंधन के सामने कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं SC-ST बैकलॉग पदों को अनारक्षित करने का आधार क्या था? किस स्तर पर अनुमति दी गई? संबंधित नियमों की व्याख्या किसने की? और यदि प्रक्रिया में कोई चूक हुई तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?

अब निगाहें WCL प्रबंधन के जवाब और आगे होने वाली जांच पर टिकी हैं क्योंकि मामला सिर्फ दो पदोन्नतियों का नहीं बल्कि आरक्षण के संवैधानिक अधिकार और संस्थागत पारदर्शिता की विश्वसनीयता का है आयोग की जांच में यदि आरोप सही पाए जाते है तो यह विवाद WCL की पदोन्नति व्यवस्था पर सवाल खड़े कर सकता है.



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