महिलाओं के निजी कार्यक्रम में वेकोली की यंत्रणा पर उठ रहे सवाल
◾क्वालिटी और सेल्स विभाग की सक्रियता संदेह के घेरे में
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : बल्लारपुर क्षेत्र के सास्ती-धोपटाला स्थित मनोरंजन केंद्र में 22 अगस्त को संपन्न महिलाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम को लेकर अब चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है इस कार्यक्रम को भले ही महिलाओं का निजी आयोजन बताया जा रहा हो लेकिन आयोजन की तैयारियों से लेकर प्रमुख अतिथियों के स्वागत और व्यवस्था तक बल्लारपुर क्षेत्र की यंत्रणा के सक्रियता ने इस दावे पर ही सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
सूत्रों के अनुसार कार्यक्रम को सफल बनाने में बल्लारपुर क्षेत्र के क्वालिटी और सेल्स विभाग की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही. कार्यक्रम से जुड़ी व्यवस्थाओं में अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी और संसाधनों के इस्तेमाल की चर्चा अब पूरे क्षेत्र में जोर पकड़ रही है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह वास्तव में महिलाओं का निजी कार्यक्रम था, तो वेकोली की यंत्रणा इसमें इतनी सक्रिय क्यों दिखाई दी? और यदि कंपनी के अधिकारी व संसाधन कार्यक्रम की व्यवस्था में लगाए गए थे, तो इसे निजी कार्यक्रम बताने के पीछे वास्तविक स्थिति क्या है?
क्षेत्रीय महाप्रबंधक द्वारा इस आयोजन को महिलाओं का निजी कार्यक्रम बताया जाना और दूसरी ओर क्षेत्र के विभिन्न विभागों की सक्रियता इन दोनों बातों के बीच दिखाई दे रहे विरोधाभास ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है.
विशेष रूप से क्वालिटी विभाग के साथ सेल्स विभाग की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं चर्चा है कि आयोजन की व्यवस्थाओं में कंपनी के अधिकारियों और संसाधनों की भूमिका रही , ऐसे में यदि कंपनी के अधिकारी- कर्मचारी या संसाधनों का उपयोग हुआ है तो इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई और इसकी जवाबदेही किसकी है यह स्पष्ट होना जरूरी है.
यह मामला अब केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है यदि निजी कार्यक्रम के लिए वेकोली की व्यवस्था, अधिकारी या संसाधन इस्तेमाल किए गए हैं तो यह कंपनी के नियमों और वित्तीय अनुशासन के लिहाज से गंभीर सवाल खड़े कर सकता है इसीलिए इस मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों की पुष्टि के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) से जांच की मांग उठने लगी है.
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल अब वेकोली मुख्यालय की चुप्पी को लेकर उठ रहा है यदि कार्यक्रम पूरी तरह निजी था तो कंपनी के अधिकारी- कर्मचारी की सक्रियता पर स्पष्टीकरण क्यों नहीं दिया जा रहा? और यदि कंपनी के संसाधनों का उपयोग हुआ है तो इसकी अनुमति और प्रक्रिया क्या थी? इन सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है क्योंकि मामला किसी एक कार्यक्रम का नहीं बल्कि वेकोली की संपत्ति, संसाधनों और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ा है.
अब निगाहें वेकोली मुख्यालय और विजिलेंस तंत्र पर टिकी हैं कि इस पूरे प्रकरण में उठ रहे सवालों का जवाब मिलता है या फिर यह मामला भी ‘निजी कार्यक्रम’ के नाम पर फाइलों में दबकर रह जाता है.









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