सतर्कता सप्ताह के दरम्यान नियमों की अनदेखी? निजी कार्यक्रम में वेकोली की यंत्रणा झोंकने पर उठे सवाल

 




सतर्कता सप्ताह के दरम्यान नियमों की अनदेखी? निजी कार्यक्रम में वेकोली की यंत्रणा झोंकने पर उठे सवाल

◾प्रिवेंटिव विजिलेंस अभियान के बीच क्षेत्रीय महाप्रबंधक की भूमिका पर जांच की मांग 


 चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में एक ओर 17 अगस्त से सतर्कता जागरूकता सप्ताह–2026 के तहत प्रिवेंटिव सतर्कता अभियान चलाकर अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमों, नीतियों तथा कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का पाठ पढ़ाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर बल्लारपुर क्षेत्र में आयोजित एक निजी स्वरूप के कार्यक्रम में वेकोली की यंत्रणा के कथित इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

सतर्कता अभियान के शुभारंभ अवसर पर अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. हेमंत शरद पांडे ने अधिकारियों-कर्मचारियों से आवश्यक नियमों और नीतियों की जानकारी रखने तथा कार्य के दौरान उनका पालन करने का आह्वान किया था . उन्होंने इस वर्ष की थीम “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” को केवल नारा नहीं बल्कि दैनिक जीवन और कार्यप्रणाली में उतारने की आवश्यकता बताई. 

मुख्य सतर्कता अधिकारी अजय मधुकर म्हेत्रे ने भी प्रिवेंटिव विजिलेंस के माध्यम से कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने तथा संभावित अनियमितताओं को समय रहते रोकने पर जोर दिया. 

लेकिन इसी सतर्कता सप्ताह के दौरान 22 अगस्त को बल्लारपुर क्षेत्र में आयोजित एक निजी कार्यक्रम में वेकोली के संसाधनों की तैनाती को लेकर आरोप है कि क्षेत्रीय महाप्रबंधक की ओर से कार्यक्रम के लिए वेकोली के दर्जनों वाहनों, सुरक्षा रक्षकों और अन्य अधिकारियों की व्यवस्था की गई, जिससे अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि कार्यक्रम निजी स्वरूप का था, तो वेकोली के संसाधनों और कर्मचारियों को वहां किस अधिकार के तहत तैनात किया गया?

एक तरफ कर्मचारियों को नियमों का पालन करने, संसाधनों के सदुपयोग और सत्यनिष्ठा का संदेश दिया जा रहा है तो दूसरी तरफ उसी अवधि में सरकारी उपक्रम के संसाधनों के इस्तेमाल की शिकायत सामने आना यह वेकोली की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है.

अब मांग उठ रही है कि प्रिवेंटिव सतर्कता अभियान के तहत इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि निजी कार्यक्रम में वेकोली के वाहनों, सुरक्षा व्यवस्था तथा अधिकारियों की तैनाती किसके आदेश पर और किस नियम के तहत की गई. चूंकि यह मामला केवल वाहनों की तैनाती तक सीमित नहीं है यदि सतर्कता विभाग जांच करता है तो कार्यक्रम में तैनात वेकोली के कर्मचारियों की संख्या, वाहनों का उपयोग, ड्यूटी आदेश, ईंधन खर्च, सुरक्षा व्यवस्था तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका जैसे कई पहलुओं की जांच के दायरे में आने की संभावना है.

अब असली परीक्षा वेकोली के सतर्कता तंत्र की है , क्या “सत्यनिष्ठा से समृद्धि” का संदेश केवल मंचों और कार्यालयों तक सीमित रहेगा, या फिर इसी सतर्कता सप्ताह में नियमों की अवहेलना करने वालों से भी जवाब मांगा जाएगा?

यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो तस्वीर साफ हो सकती है कि निजी आयोजन में वेकोलि की यंत्रणा का इस्तेमाल नियमसम्मत था या फिर सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया गया.  फिलहाल निगाहें वेकोली प्रबंधन और सतर्कता विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं.



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