क्षेत्रीय अस्पताल में 'संडे ड्यूटी' की लिस्ट आखिर किसके इशारे पर बदल रही?

 




क्षेत्रीय अस्पताल में 'संडे ड्यूटी' की लिस्ट आखिर किसके इशारे पर बदल रही?

◾'चहेते' कर्मचारियों को फायदा पहुंचाने के आरोप, वेकोली को आर्थिक नुकसान का भी उठ रहा सवाल


 चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : चंद्रपुर क्षेत्र के क्षेत्रीय अस्पताल में संडे ड्यूटी को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी की कार्यशैली पर कर्मचारियों के बीच नाराजगी बढ़ती जा रही है आरोप है कि अस्पताल में संडे ड्यूटी का निर्धारण नियमों और आवश्यकता के आधार पर नहीं बल्कि निजी स्वार्थ और चहेते कर्मचारियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है.

अब सवाल यह उठ रहा है कि पिछले दो सप्ताह से केवल 11 कर्मचारियों के भरोसे संडे के दिन अस्पताल का संचालन पूरी तरह सुचारू रूप से होता रहा , मरीजों की सेवाओं में कोई व्यवधान नहीं आया ऐसे में आज 2 अगस्त के संडे को अचानक 17 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ गई? यदि अस्पताल संचालन के लिए वास्तव में 17 कर्मचारियों की आवश्यकता थी तो पिछले दो सप्ताह तक केवल 11 कर्मचारियों से ही काम क्यों लिया गया? और यदि 11 कर्मचारी पर्याप्त थे तो फिर अब अतिरिक्त छह कर्मचारियों को संडे की ड्यूटी देकर किसका हित साधा जा रहा है?

सूत्रों के अनुसार इससे पहले कई महीनों तक प्रत्येक संडे करीब 30  कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती थी जिससे वेकोली पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ने की चर्चा होती रही. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर जरूरत से अधिक कर्मचारियों को संडे की ड्यूटी देने का लाभ किसे मिल रहा था? क्या सार्वजनिक उपक्रम के धन का दुरुपयोग किया गया? यदि हां, तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कुछ दिन पहले वेकोली मुख्यालय की तीन सदस्यीय समिति ने अस्पताल का निरीक्षण किया था, बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान संडे ड्यूटी व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे जिसके बाद पिछले दो सप्ताह तक केवल 11 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई, जिससे यह संकेत मिला कि व्यवस्था को नियमों के अनुरूप किया जा रहा है लेकिन अब एक बार फिर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 17 किए जाने से पूरे मामले पर संदेह गहरा गया है.

बताया जा रहा है कि रविवार को अतिरिक्त कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के लिए क्षेत्रीय महाप्रबंधक से कोई स्पष्ट स्वीकृति नहीं ली गई. यदि यह तथ्य सही है तो बिना सक्षम अनुमति के ड्यूटी सूची तैयार करना प्रशासनिक नियमों के विपरीत माना जा सकता है इसके साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि मुख्यालय ने व्यवस्था सुधारने के संकेत दिए थे तो फिर क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी पुराने तरीके पर क्यों लौट आए?

अब कर्मचारियों और संबंधित हलकों में यह मांग तेज हो गई है कि वेकोली मुख्यालय इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए, संडे ड्यूटी से संबंधित सभी आदेशों, स्वीकृतियों और भुगतान का ऑडिट कराया जाए तथा यह सार्वजनिक किया जाए कि किस आधार पर हर सप्ताह कर्मचारियों की संख्या बदली जा रही है.  यदि जांच में पक्षपात, नियमों की अनदेखी या आर्थिक अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जानी चाहिए. 

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वेकोली मुख्यालय इस पूरे प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करेगा, या फिर संडे ड्यूटी का यह विवाद यूं ही सवालों के घेरे में बना रहेगा?




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