प्रबंधन ने माना ‘MINE INJURY’, फिर भी ‘INJURY ON DUTY’ से परहेज क्यों?
◾प्रभावशाली संगठन के दबाव में नंदगांव खदान हादसे को दबाने का आरोप
चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र की नंदगांव भूमिगत खदान में हुए हादसे ने एक बार फिर खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली और घायल कामगार के प्रति संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं हादसे में घायल कर्मचारी कुमारस्वामी गिरवेनी हैं जो खदान में TRAMMING PERSONNEL के पद पर कार्यरत हैं , हैरानी की बात यह है कि प्रबंधन के चिकित्सा दस्तावेजों में उनकी चोट को “MINE INJURY WITH POLYTRAUMA WITH ABDOMEN DISTENSION” के रूप में दर्ज किया गया है इसके बावजूद घायल कर्मचारी को अब तक ‘INJURY ON DUTY’ अर्थात ड्यूटी के दौरान लगी चोट का दर्जा क्यों नहीं दिया गया, यह सवाल प्रबंधन की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करता है.
9 अक्टूबर को नंदगांव भूमिगत खदान में हुए हादसे के दौरान कुमारस्वामी गिरवेनी टब और पिलर के बीच दबकर घायल हो गए थे , इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए चिकित्सा रिकॉर्ड में ‘MINE INJURY WITH POLYTRAUMA WITH ABDOMEN DISTENSION’ दर्ज होना अपने आप में महत्वपूर्ण है इसके बावजूद ‘INJURY ON DUTY’ की औपचारिक मान्यता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होना कई सवाल खड़े करता है आखिर जब मामला खदान में हुई चोट का है तो संबंधित कर्मचारी को नियमानुसार मिलने वाले अधिकारों और सुविधाओं के संबंध में निर्णय लेने में देरी किस वजह से हो रही है?
इस पूरे मामले में उपक्षेत्रीय प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं , आरोप है कि एक प्रभावशाली संगठन के दबाव के चलते मामले को गंभीरता से आगे बढ़ाने के बजाय उसे दबाने का प्रयास किया जा रहा है हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है यदि प्रबंधन की ओर से कोई दबाव नहीं है तो उसे तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि घायल कर्मचारी को लेकर उठ रहे संदेह दूर हो सकें.
हादसे के बाद घायल कर्मचारी को लेकर यह भी सवाल उठे हैं कि उसे पर्याप्त चिकित्सकीय राहत और नियमानुसार प्रक्रिया का लाभ मिला या नहीं , यदि किसी घायल कामगार को चोट के बाद भी उपस्थिति दर्ज कराने अथवा दर्द कम होने तक घर जाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है चिकित्सा संबंधी निर्णय और ड्यूटी पर चोट की मान्यता जैसे विषयों पर प्रबंधन को पारदर्शिता बरतनी चाहिए.
नंदगांव खदान हादसे में घायल कर्मचारी की स्थिति, चिकित्सा रिकॉर्ड में दर्ज ‘MINE INJURY’ और ‘INJURY ON DUTY’ की मान्यता के बीच अंतर को लेकर वेकोलि के वरिष्ठ अधिकारियों को स्पष्ट जवाब देना चाहिए , क्या इस मामले में नियमानुसार जांच की गई? घायल कर्मचारी को ड्यूटी पर लगी चोट का दर्जा देने संबंधी प्रक्रिया कहां तक पहुंची? और यदि देरी हुई है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
खदान में काम करने वाला कर्मचारी उत्पादन की जिम्मेदारी निभाते हुए अपनी जान जोखिम में डालता है ऐसे में हादसे के बाद उसके अधिकारों को लेकर अनिश्चितता बनी रहना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता. अब सवाल सिर्फ एक घायल कामगार का नहीं, बल्कि वेकोलि में कामगारों की सुरक्षा, अधिकारों और प्रबंधन की जवाबदेही का है.





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