नंदगांव खदान हादसे के 8 दिन बाद जागा इंटक; सीएमडी को लिखे पत्र में दुर्घटना दबाने का आरोप

 


नंदगांव खदान हादसे के 8 दिन बाद जागा इंटक; सीएमडी को लिखे पत्र में दुर्घटना दबाने का आरोप


◾सीटू और एचएमएस स्वागत समारोहों में व्यस्त , बीएमएस और एटक की ओर से कोई पहल सामने नहीं आई


 चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र के नंदगांव भूमिगत खदान में 9 अक्टूबर को हुए हादसे को लेकर अब श्रमिक संगठन इंटक ने प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है दुर्घटना के आठ दिन बाद इंटक के महामंत्री के.के. सिंह ने वेकोलि के सीएमडी को पत्र लिखकर हादसे को दबाने और घायल कामगार पर दबाव डालने के गंभीर आरोप लगाए हैं सवाल यह है कि यदि हादसे में सब कुछ नियमानुसार हुआ, तो फिर घायल कामगार के उपचार, फिटनेस और ड्यूटी पर वापसी को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?

इंटक के अनुसार नंदगांव भूमिगत खदान में 9 अक्टूबर को कुमार गिरवेणी कोल टब और पिलर के बीच दबने से घायल हो गए थे, आरोप है कि हादसे के बाद प्रबंधन ने घटना को दबाने के लिए पूरी ताकत लगा दी. घायल कामगार को उपचार के बाद रविवार की छुट्टी के दिन अस्पताल से डिस्चार्ज कराया गया. इंटक महामंत्री के.के. सिंह ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों ने घायल कामगार को उसके घर से लाकर हाजिरी लगवाई, आरोप है कि काम पर उपस्थित होने की स्थिति में नहीं होने के बावजूद उसे हाजिरी देने का लालच देकर और दबाव बनाकर यह प्रक्रिया पूरी कराई गई जो कि घायल कामगार के साथ अन्याय का मामला नहीं, बल्कि श्रमिक सुरक्षा और कार्यस्थल पर मानवीय संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है हादसे के आठ दिन बाद सामने आए इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि घायल कामगार को चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित किए बिना हाजिरी लगाने के लिए किसने दबाव बनाया? क्या प्रबंधन ने कामगार की सेहत से ज्यादा अपनी छवि की चिंता की? इन सवालों के जवाब अब प्रबंधन को देने होंगे. 

के.के. सिंह ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि दुर्घटना के समय कुछ अधिकारी और विभिन्न संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत थे. इंटक का दावा है कि संबंधित लोगों को बचाने के लिए दुर्घटना को जल्दबाजी में दबाने की कोशिश की जा रही है और इसमें उच्च प्रबंधन के अधिकारियों की भूमिका भी हो सकती है हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए दुर्घटना के कारणों, उस समय ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों, सुरक्षा व्यवस्था और हादसे के बाद अपनाई गई प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है.

नंदगांव खदान हादसे को लेकर श्रमिक संगठनों की भूमिका भी चर्चा में है इंटक ने जहां घटना के आठ दिन बाद सीएमडी को पत्र लिखकर आरोपों को उठाया है वहीं अन्य संगठनों की सक्रियता को लेकर सवाल किए जा रहे हैं आरोप है कि सीटू और एचएमएस उपक्षेत्रीय प्रबंधक के स्वागत समारोहों में व्यस्त रहे, जबकि बीएमएस और एटक की ओर से इस मामले में कोई प्रमुख पहल सामने नहीं आई. 

खदान में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा, दुर्घटना के बाद उपचार और घायल कर्मचारी के अधिकार किसी एक संगठन का मुद्दा नहीं बल्कि सभी श्रमिक संगठनों की सामूहिक जिम्मेदारी है ऐसे में सवाल उठता है कि जब एक कामगार खदान हादसे में घायल हुआ, तब उसकी सुरक्षा और न्याय के लिए संगठनों की आवाज कितनी बुलंद रही?

इंटक के पत्र के बाद अब निगाहें वेकोलि के उच्च प्रबंधन पर टिकी हैं क्या दुर्घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी? क्या घायल कामगार पर हाजिरी के लिए दबाव डालने के आरोपों की पड़ताल होगी? क्या हादसे के समय ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी? खदान में हादसा होना जितना गंभीर है उससे भी गंभीर सवाल हादसे के बाद की कार्यप्रणाली पर उठ रहे हैं यदि प्रबंधन ने नियमों का पालन किया है तो उसे जांच और दस्तावेजों के जरिए स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए वहीं, यदि दुर्घटना को दबाने या घायल कामगार पर दबाव बनाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.



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