प्रभावशाली संगठन के दबाव में जांच को दबाने का आरोप तो प्रबंधन ने साधी चुप्पी

 



प्रभावशाली संगठन के दबाव में जांच को दबाने का आरोप तो प्रबंधन ने साधी चुप्पी

◾हादसे के एक सप्ताह बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं, घायल कर्मचारी को ‘इंजुरी ऑन ड्यूटी’ तक नहीं

चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र के नंदगांव खदान में हुए हादसे के एक सप्ताह बाद भी प्रबंधन की ओर से कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई सामने नहीं आने से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं लालपेठ उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक की चुप्पी ने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया है हादसे की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने के बजाय मामले को दबाने की कोशिश किए जाने के आरोप लग रहे हैं यदि ये आरोप सही हैं तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि खदान सुरक्षा और श्रमिकों के अधिकारों के प्रति गंभीर उदासीनता का मामला है.

प्रबंधन की ओर से सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दावे किए जाते हैं लेकिन हादसे के बाद की कार्रवाई इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर रही है जिस खदान में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और बैठकों की बात होती है उसी परिसर में कर्मचारी हादसे का शिकार हो जाए और एक सप्ताह बाद भी जिम्मेदारों की जवाबदेही तय न हो, तो आखिर सुरक्षा संबंधी दावों पर भरोसा कैसे किया जाए?

हादसे में घायल कर्मचारी को एक सप्ताह बाद भी ‘इंजुरी ऑन ड्यूटी’ का लाभ नहीं मिलने की बात सामने आ रही है आरोप है कि कर्मचारी को दर्द कम होने तक हाजिरी लगाकर घर जाने की सलाह दी गई , यदि कर्मचारी वास्तव में ड्यूटी के दौरान घायल हुआ है तो उस मामले में नियमानुसार कार्रवाई, चिकित्सकीय स्थिति का उचित आकलन और लागू सुविधाओं का लाभ सुनिश्चित करना प्रबंधन की जिम्मेदारी है घायल कर्मचारी को राहत देने के बजाय उसे प्रक्रियाओं के बीच उलझाए रखने की स्थिति श्रमिक हितों पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

इस मामले में यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि एक प्रभावशाली श्रमिक संगठन के दबाव में उपक्षेत्रीय प्रबंधन सामान्य कर्मचारी के साथ अन्याय कर रहा है हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है यदि किसी संगठन के प्रभाव के कारण घायल कर्मचारी के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, तो यह औद्योगिक न्याय और निष्पक्ष प्रशासन की भावना के विपरीत होगा, प्रबंधन को स्पष्ट करना चाहिए कि कर्मचारी के मामले में नियमों का पालन हो रहा है या किसी बाहरी दबाव में निर्णय लिए जा रहे हैं.

सबसे बड़ा सवाल उन श्रमिक संगठनों की भूमिका पर भी उठ रहा है जो श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों के नाम पर प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन करते रहे हैं इतने गंभीर हादसे के बाद भी यदि संगठनों की ओर से प्रभावी हस्तक्षेप दिखाई नहीं दे रहा है तो श्रमिकों के बीच उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है क्या घायल कर्मचारी के मामले में भी संगठन सक्रियता दिखाएंगे, या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

नंदगांव खदान हादसे की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर हादसे के कारणों, सुरक्षा में संभावित चूक और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट की जानी चाहिए. जांच में जानबूझकर विलंब करने या तथ्यों को छिपाते की पुष्टि होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए साथ ही घायल कर्मचारी को नियमानुसार मिलने वाले लाभ और चिकित्सकीय सहायता के संबंध में तत्काल निर्णय लिया जाना चाहिए. 

अब सवाल केवल हादसे का नहीं, बल्कि उसके बाद प्रबंधन की जवाबदेही का है लालपेठ उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक को चुप्पी तोड़कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, आखिर नंदगांव खदान हादसे की जांच कब शुरू होगी, घायल कर्मचारी को उसका अधिकार कब मिलेगा और सुरक्षा में लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी? इन सवालों के जवाब का इंतजार केवल घायल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पूरे श्रमिक वर्ग को है.



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