खदान में हुवे हादसे के मामले में प्रबंधक और सेफ्टी ऑफिसर की भूमिका संदेह के घेरे में

 



खदान में हुवे हादसे के मामले में प्रबंधक और सेफ्टी ऑफिसर की भूमिका संदेह के घेरे में

◾पहले अस्पताल से डिस्चार्ज, फिर घर से बुलाकर हाजिरी , फिटनेस सर्टिफिकेट का दबाव? अब ओवरमैन को बचाने का आरोप. 

चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : चंद्रपुर क्षेत्र के नंदगांव खदान में कर्मचारी के घायल होने की घटना ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं आरोप है कि घायल कर्मचारी को पहले अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज करवाया गया, इसके अगले ही दिन दो कर्मचारियों को उसके घर भेजकर उसे खदान में बुलाया गया और उसकी हाजिरी भी लगवाई गई लेकिन बाद में जब कर्मचारी के मेडिकल अनफिट होने का मामला ध्यान में आया तो उसे दोबारा अस्पताल भेजकर फिटनेस सर्टिफिकेट लाने को कहा गया , चर्चा है कि संबंधित डॉक्टर ने कर्मचारी को फिट घोषित करने के बजाय उसका चिकित्सकीय परीक्षण किया, दवाइयां दीं और आराम करने की सलाह दी. ऐसे में सवाल उठता है कि जब कर्मचारी की शारीरिक स्थिति सामान्य नहीं थी, तो उसे खदान में बुलाकर हाजिरी लगवाने की जल्दबाजी आखिर किसके कहने पर की गई? क्या कर्मचारी के स्वास्थ्य से अधिक प्राथमिकता हाजिरी थी ? 

घटना के समय मौके पर मौजूद दो ओवरमैन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं आरोप है कि इन दोनों को बचाने के प्रयास में खदान प्रबंधक और सेफ्टी ऑफिसर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं हालांकि मामले की निष्पक्ष जांच ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर सकती है सबसे गंभीर सवाल यह है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बावजूद अब तक प्रारंभिक जांच (प्रिलिमिनरी इन्क्वायरी) क्यों नहीं हुई? क्या जांच में देरी महज प्रशासनिक लापरवाही है या इसके पीछे किसी प्रभावशाली संगठन का दबाव काम कर रहा है? घटनास्थल पर मौजुदो की जांच कर जवाबदेही तय करने के बजाय यदि मामले को टालने की कोशिश की जा रही है तो यह खदान की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है.

नंदगांव खदान में प्रबंधन की लापरवाही के कारण पहले भी एक कामगार की मौत होने को लेकर आरोप सामने आए थे उस समय भी प्रबंधन द्वारा जांच कराने का लिखित आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन उस जांच का क्या निष्कर्ष निकला, इसकी जानकारी अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है यदि पुराने मामले की जांच और जवाबदेही की स्थिति स्पष्ट नहीं है तो मौजूदा घटना को लेकर संदेह गहराना स्वाभाविक है इस बार की घटना मे परिणाम गंभीर हो सकते थे , ऐसे में सवाल केवल एक कर्मचारी की हाजिरी का नहीं, बल्कि उसकी जान की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही का है.

खदानों में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के दावे अक्सर किए जाते हैं सुरक्षा बैठकें, नियमों की समीक्षा और सतर्कता के संदेश भी दिए जाते हैं लेकिन यदि घायल कर्मचारी को अस्पताल से छुट्टी दिलाने, घर से बुलाकर हाजिरी लगवाने और बाद में मेडिकल फिटनेस का मामला उठने जैसी घटनाओं के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी. 

अब प्रबंधन के सामने सवाल है कि घटना की प्रारंभिक जांच कब होगी, घायल कर्मचारी को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया की जिम्मेदारी कौन तय करेगा और पुराने मामले में दिए गए जांच के आश्वासन का क्या हुआ? इन सवालों के स्पष्ट जवाब जरूरी हैं अब देखना यह है कि वेकोलि प्रबंधन निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी फाइलों और आश्वासनों के बीच दबकर रह जाता है.



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