अधिकारी-कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस IN-OUT अनिवार्य
◾29 अगस्त की खबर के बाद 31 अगस्त को क्षेत्रीय मानव संसाधन प्रबंधक का फरमान
चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : वेकोली समेत चंद्रपुर क्षेत्र में भी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की गई बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था की अनदेखी को लेकर अब क्षेत्रीय प्रबंधन अलर्ट मोड़ में नजर आ रहा है खासकर रैयतवारी उपक्षेत्र में बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर सामने आए सवालों ने व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं.
इस मामले को लेकर 29 अगस्त को ‘राज्य रिपोर्टर न्यूज’ में खबर प्रकाशित होने के बाद 31 अगस्त 2026 को क्षेत्रीय मानव संसाधन प्रबंधन की ओर से एक पत्र जारी किया गया. इस पत्र में सक्षम प्राधिकारी के निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि वेतन तैयार करने के लिए सभी अधिकारी एवं कर्मचारी प्रतिदिन बायोमेट्रिक मशीन में IN तथा OUT दोनों समय की उपस्थिति दर्ज करें.
उक्त पत्र में क्षेत्र के सभी खान प्रबंधकों, अधिकारियों एवं कार्यपालकों को निर्देश दिए गए हैं कि उनके अधीनस्थ अधिकारी-कर्मचारी नियमित रूप से दोनों समय की उपस्थिति दर्ज करें साथ ही IN और OUT दोनों उपस्थिति दर्ज किए बिना वेतन तैयार नहीं करने की बात भी कही गई है.
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि 29 अगस्त की खबर के बाद 31 अगस्त को जारी हुआ यह फरमान महज संयोग है या फिर खबर का असर? इसका जवाब तो क्षेत्रीय प्रबंधन ही बेहतर दे सकता है लेकिन घटनाक्रम ने निश्चित तौर पर चर्चा को हवा दे दी है.
सिर्फ आदेश जारी कर देने से बायोमेट्रिक व्यवस्था की खामियां दूर होंगी या नहीं यह आने वाले समय पर पता चलेगा परंतु असली सवाल यह है कि क्या प्रबंधन बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की नियमित जांच करेगा? क्या मशीन में दर्ज IN-OUT समय और कर्मचारी की वास्तविक ड्यूटी का मिलान किया जाएगा? और यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी सामने आती है तो क्या संबंधित कर्मचारी के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारी पर भी कार्रवाई होगी?
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि यह आदेश केवल अधिकारी और कर्मचारियों तक सीमित रहेगा या संगठन के पदाधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होगा? यदि नियम उपस्थिति को लेकर है तो फिर नियम की कसौटी सभी के लिए एक समान होनी चाहिए तभी यह पारदर्शिता कहलाएगा .
वेतन को बायोमेट्रिक उपस्थिति से जोड़ने का आदेश जारी हो चुका है तब ‘इन-आउट के खेल’ को नियंत्रित करना भी प्रबंधन की जिम्मेदारी है वरना करोड़ों की व्यवस्था और आधुनिक तकनीक लगाने के बावजूद यदि उपस्थिति में मनमानी जारी रहती है तो फिर बायोमेट्रिक सिस्टम की उपयोगिता पर ही सवाल उठना तय है.
अब नजर इस बात पर है कि 31 अगस्त का यह आदेश वास्तव में जमीन पर कितना उतरता है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जाती है या फिर मामला एक और सरकारी/प्रशासनिक आदेश बनकर फाइलों में दब जाता है.






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