कर्मचारी बदले लेकिन 'वसूली डायरी' नहीं! आखिर किस-किस अधिकारी तक पहुंचता है हिसाब ?
चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : उपक्षेत्रीय प्रबंधक कार्यालय में कथित वसूली के खेल को लेकर एक चौंकाने वाला दावा सामने आ रहा हैं चर्चा है कि कार्यालय में वसूली का काम संभालने वाले कर्मचारी तो बदल जाते हैं लेकिन उनके साथ कथित वसूली का पूरा हिसाब रखने वाली एक "डायरी" भी नए कर्मचारी को सुपुर्द कर दी जाती है.
सूत्रों का दावा है कि पदभार छोड़ने वाला कर्मचारी ठेकेदारों से साफ शब्दों में कह रहा है मैंने मेरा हिसाब दे दिया है मेरे कार्यकाल तक आपका कोई बिल लंबित नहीं था, अब आगे के व्यवहार और भुगतान के लिए जिस कर्मचारी को डायरी सौंपी गई है उसी से संपर्क करें.
यदि यह दावा सही है तो सवाल केवल एक कर्मचारी का नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली का है आखिर वह कथित डायरी क्या है? उसमें केवल लंबित बिलों का रिकॉर्ड दर्ज है या फिर कथित "परसेंटेज" और वसूली का पूरा लेखा-जोखा भी मौजूद है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि उस कथित डायरी के वास्तविक वारिस कौन हैं ? क्या यह केवल कर्मचारी से कर्मचारी तक पहुंचने वाली डायरी है या फिर उसके पीछे विभाग के कुछ अधिकारी भी कथित रूप से लाभार्थी हैं? यदि ऐसा नहीं है तो फिर इस डायरी को संभालने और आगे सौंपने की आखिर जरूरत क्यों पड़ रही है?
कार्यालय में यह चर्चा तेज है कि यदि इस कथित डायरी की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई ऐसे नाम सामने आ सकते हैं जिनकी भूमिका अब तक पर्दे के पीछे रही है सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच एजेंसियां इस कथित डायरी को अपने कब्जे में लेकर उसकी जांच करेंगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
अब सबकी निगाहें संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और सतर्कता तंत्र पर टिकी हैं यदि इन आरोपों में सच्चाई का अंश भी है तो यह मामला केवल कथित वसूली तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जवाबदेही, पारदर्शिता और प्रशासनिक ईमानदारी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा.








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