अस्पताल मे इलाज के लिए डॉक्टर नहीं, दवा देने वाले फार्मासिस्ट भी नदारद

 



अस्पताल मे इलाज के लिए डॉक्टर नहीं, दवा देने वाले फार्मासिस्ट भी नदारद

◾चंद्रपुर क्षेत्र का सीआरसी डिस्पेंसरी बना 'शो-पीस', हजारों कर्मचारियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़

 चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : वेकोली चंद्रपुर क्षेत्र का सीआरसी डिस्पेंसरी इन दिनों बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का जीता-जागता उदाहरण बन गया है लाखों रुपये खर्च कर तैयार की गई इस डिस्पेंसरी में न तो स्थायी डॉक्टर उपलब्ध हैं और न ही मरीजों को दवा देने के लिए फार्मासिस्ट की नियुक्ति की गई है परिणामस्वरूप हजारों कर्मचारियों एवं उनके परिवारों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है जिससे वेकोली प्रबंधन और क्षेत्रीय चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

जानकारी के अनुसार वर्तमान में सीआरसी डिस्पेंसरी का संचालन केवल दो जनरल असिस्टेंट के भरोसे चल रहा है यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार भी समय पर नहीं मिल पा रहा मरीजों को पहले घंटों इंतजार कराया जाता है और बाद में एंबुलेंस से लालपेठ स्थित क्षेत्रीय अस्पताल भेजकर इलाज कराया जाता है कर्मचारियों का कहना है कि यदि किसी गंभीर मरीज की स्थिति बिगड़ जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी द्वारा 7 अप्रैल 2026 को जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि क्षेत्रीय चिकिसाल की वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी अपने नियमित कार्यों के अतिरिक्त 1 अप्रैल 2026 से आवश्यकता पड़ने पर अस्थायी रूप से सीआरसी डिस्पेंसरी का दौरा कर चिकित्सा सेवाएं देंगी साथ ही उन्होंने यह व्यवस्था अगले आदेश तक लागू रहने की बात भी आदेश में कही गई है.

लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि विगत 2 माह से इस डिस्पेंसरी में कोई डॉक्टर आया ही नही जिस आदेश को क्षेत्रीय चिकित्सा अधिकारी ने स्वयं जारी किया उसका पालन भी प्रभावी ढंग से नहीं हो रहा. मरीजों को नियमित रूप से डॉक्टर की उपलब्धता नहीं मिल रही जिससे आदेश केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहा है. 

सूत्रों के अनुसार क्षेत्रीय चिकित्सालय में कार्यरत फार्मासिस्टों से उनके मूल कार्य के अलावा अन्य जिम्मेदारियां सौंपी गई है कर्मचारियों का कहना है कि यदि उनमें से एक फार्मासिस्ट की नियमित नियुक्ति सीआरसी डिस्पेंसरी में कर दी जाए तो मरीजों को कम से कम दवाइयां समय पर उपलब्ध हो सकेंगी इसके बावजूद प्रबंधन इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाता दिखाई नहीं दे रहा. 

कर्मचारियों ने सीआरसी डिस्पेंसरी में स्थायी चिकित्सक और फार्मासिस्ट की तत्काल नियुक्ति की मांग की है उनका कहना है कि डिस्पेंसरी केवल भवन बनकर रह गई है जबकि इसका उद्देश्य कर्मचारियों को उनके कार्यस्थल के निकट तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था. 

सबसे बड़ा सवाल उन कामगार संगठनों पर भी उठ रहा है जो कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने का दावा करते हैं कर्मचारियों का आरोप है कि डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली जैसे गंभीर मुद्दे पर अधिकांश संगठन खामोश हैं पहले किसी दुर्घटना के बाद डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर आंदोलन करने वाले संगठन अब इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे हुए हैं.

कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते सीआरसी डिस्पेंसरी में स्थायी डॉक्टर और फार्मासिस्ट की नियुक्ति नहीं की गई तो किसी भी आपातकालीन स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं जिसकी पूरी जिम्मेदारी वेकोली प्रबंधन और संबंधित चिकित्सा विभाग की होगी.




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