भटाडी प्रबंधन की दोहरी नीति पर उठे सवाल

 





भटाडी प्रबंधन की दोहरी नीति पर उठे सवाल

◾क्लर्क चला रहे कैंटीन तो कोई काम नही करने वाले कर्मचारियों को भी रविवार की ड्यूटी 

 चंद्रपुर,( राज्य रिपोर्टर न्यूज ) : वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड चंद्रपुर क्षेत्र की भटाडी खुली खदान में प्रबंधन की दोहरी कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारियों में असंतोष और भ्रम की स्थिति निर्माण हो गई है एक ओर प्रबंधन ने हाल ही में उन कर्मचारियों की सूची जारी की थी जो अपने मूल पद एवं ग्रेड के अनुरूप कार्य नहीं कर रहे हैं और स्पष्ट किया था कि ऐसे कर्मचारियों को रविवार की ड्यूटी का लाभ नहीं दिया जाएगा , वहीं दूसरी ओर अब उन्हीं कर्मचारियों को रविवार की ड्यूटी दिए जाने से प्रबंधन की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है. 

जानकारी के अनुसार भटाडी खदान में क्लर्क पद पर कार्यरत कर्मचारियों से कैंटीन का संचालन कराया जा रहा है जबकि कई ऐसे कर्मचारी, जिन पर नियमित कार्य नहीं करने और केवल हाजिरी लगाकर कार्यस्थल से गायब रहने के आरोप लगते रहे हैं उन्हें भी रविवार की ड्यूटी का लाभ दिया जा रहा है इतना ही नहीं कई कर्मचारी एवं संगठनों के पदाधिकारियों को उनके मूल कार्यस्थल के बजाय अन्य स्थानों पर केवल बैठाकर रविवार की ड्यूटी दर्शाए जाने का भी आरोप लगाया जा रहा है.

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वयं प्रबंधन ने लिखित रूप से स्वीकार किया था कि कई कर्मचारी अपने मूल पद और ग्रेड पर कार्य नहीं कर रहे हैं तथा इसी आधार पर उन्हें रविवार की ड्यूटी से वंचित रखने की बात कही थी तो अब उन्हीं कर्मचारियों को किस नियम के तहत रविवार की ड्यूटी प्रदान की गई? क्या यह किसी संगठन के दबाव का परिणाम है या फिर कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को ताक पर रखा गया?

कामगारों का कहना है कि यदि नियम सभी कर्मचारियों के लिए समान हैं तो उनका पालन भी समान रूप से होना चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में नियम केवल कुछ कर्मचारियों पर लागू होते दिखाई दे रहे हैं जबकि प्रभावशाली लोगों को विशेष छूट दी जा रही है इससे ईमानदारी से काम करने वाले कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. 

इस पूरे मामले की विजिलेंस विभाग ने संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच करने की मांग की जा रही है कर्मचारियों का कहना है कि यदि जांच होती है तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि रविवार की ड्यूटी किस आधार पर दी गई, किन कर्मचारियों ने वास्तव में कार्य किया और किन्हें केवल कागजों में लाभ पहुंचाया गया, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि नियमों के दुरुपयोग और पक्षपात का गंभीर उदाहरण साबित हो सकता है.




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