क्षेत्र में मचा सियासी-संगठनी घमासान!
◾सिस्टा ने दूसरे श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों पर SC/ST बैकलॉग की पदोन्नति सीट हथियाने का लगाया आरोप
चंद्रपुर,( Rajya Reporter News ) : चंद्रपुर क्षेत्र में आरक्षित पदोन्नति के मुद्दे को लेकर श्रमिक संगठनों के बीच टकराव तेज होता दिखाई दे रहा है कोल इंडिया SC/ST एम्प्लॉईज एसोसिएशन (सिस्टा) का एक पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमे सिस्टा ने दूसरे श्रमिक संगठनों के पदाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कर्मचारियों से ऐसे संगठनों में रहने को लेकर सवाल खड़े किए हैं.
सिस्टा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह महासचिव कुमार एम. गोगुलवार के हस्ताक्षर से 3 सितंबर 2026 को जारी सूचना का पत्र वाइरल हो रहा है जिसमे उन्होंने कहा है कि कोल इंडिया लिमिटेड में इस वर्ष श्रमिक संगठनों की सदस्यता सत्यापन प्रक्रिया का पहला चरण 18 से 22 सितंबर 2026 तथा दूसरा चरण 28 और 29 सितंबर 2026 को आयोजित किया जाएगा.
पत्र में सिस्टा ने दावा किया है कि वेकोलि चंद्रपुर क्षेत्र में वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान क्लर्क ग्रेड-III से क्लर्क ग्रेड-II में पदोन्नति के दौरान अलग-अलग श्रमिक संगठनों के कुछ उच्च पदाधिकारियों ने SC/ST बैकलॉग के लिए आरक्षित पदोन्नति सीटों पर स्वयं पदोन्नति प्राप्त की, सिस्टा ने इसे आरक्षण के साथ खिलवाड़ बताते हुए ‘आरक्षण चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया है.
सिस्टा के मुताबिक यह मामला सामने आने के बाद इसका कड़ा विरोध किया और जांच समिति के माध्यम से संबंधित पदोन्नतियों को निरस्त करवाया हालांकि, पत्र में जिन पदाधिकारियों या संगठनों पर आरोप लगाए गए हैं उनके नाम स्पष्ट रूप से सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
सिस्टा ने अपने पत्र में कर्मचारियों के सामने सीधा सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि जो श्रमिक संगठन SC/ST कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकार, पदोन्नति में आरक्षण और बैकलॉग के मुद्दे पर सवालों के घेरे में आते हैं तो क्या कर्मचारियों को ऐसे संगठनों में बने रहने की जरूरत है?
सिस्टा ने कर्मचारियों से आगामी सदस्यता सत्यापन के दौरान एकजुट होकर अपने अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया है पत्र में कहा गया है कि संगठन की असली ताकत उसकी एकता में है और कमजोर कड़ी को मजबूत करना ही चुनौती का सामना करने का रास्ता है.
चंद्रपुर क्षेत्र में SC/ST कर्मचारियों की पदोन्नति और बैकलॉग का मुद्दा पहले भी विवादों में रहा है अब सिस्टा के इस पत्र ने आरक्षित पदोन्नति सीटों पर कब्जे के आरोपों को फिर से सुर्खियों में ला दिया है यदि लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल संगठनात्मक विवाद नहीं बल्कि आरक्षण नीति के क्रियान्वयन और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर सकता है.








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